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| अब सरमायेदार तय करेंगे केंद्र की सत्ता |
सियासतदानों के साथ सरमायेदारों की खिचड़ी पक रही है। नेता और उद्योगपति मिल कर 15वीं लोकसभा के लिए होने वाले चुनाव के बाद केंद्र की सत्ता पर कौन बैठे और किससे उनके हित सधें इसे लेकर ताना-बाना बुनने का काम तेजी से कर रहे हैं। सियासत की यह कैसी लीला है कि टाटा घराने के रतन टाटा और अंबानी घराने के मुकेश अंबानी मिल कर तीसरे मोर्चे और वाम मोर्चे को मिला कर सत्ता विकल्प खड़ा करने के उद्योग में लगे हुए हैं। भारतीय लोकतंत्र का यह दुश्चरित्र-तथ्य है। देश में पहले भी मतदान से लेकर सत्ता निर्माण तक धन-सूत्र थामे रहने का खेल पूंजीपति खेलते आए हैं, लेकिन यह पहली बार होगा कि दो-तीन उद्योगपति मिल बैठकर प्रधानमंत्री तय कर लें और गद्दी पर अपना मुहरा बिठा कर सत्ता पर अपनी सीधी पकड़ रखें।
» अंबानी व टाटा मिल कर पका रहे सियासी खिचड़ी
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बसपा प्रमुख मायावती, तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री अन्ना द्रमुक प्रमुख जयललिता, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू, केंद्र में खाद्य मंत्री राकांपा प्रमुख शरद पवार, केंद्र में रेल मंत्री राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, माकपा प्रमुख प्रकाश करात, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, ये सब उद्योगपतियों के साथ खिचड़ी पकाने में शामिल हैं और जो शामिल नहीं, उन्हें भी सारी 'रेसिपी मालूम है। मुकेश अंबानी की पहल पर रतन टाटा के साथ पक रही इस सियासी खिचड़ी की सुगंध शीर्ष राजनीतिक-पटल पर अभी से आने लगी है। एक तरफ मुकेश अंबानी और प्रकाश करात के बीच पिछले दिनों हुई अंतरंग मुलाकात तो दूसरी तरफ मुकेश अंबानी की खास नीरा राडिया की भाजपा नेता अनंत कुमार के साथ अंतरंगता का बेहतरीन स्वाद।
कांग्रेस-संप्रग और भाजपा-राजग को किनारे लगा कर तीसरे मोर्चे की अगुवाई में सत्ता निर्माण कराने की कवायद में उस पीआर कंसल्टेंसी कंपनी का अहम रोल है जिसके साथ मुकेश अंबानी ने अपनी कंपनी की 'लायज़निंग का काम देखने के लिए करार किया है। 'न्यूकॉम कंसल्टिंग नामकी यह कंपनी मशहूर 'वैष्णवी कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस से जुड़ी है, जिसकी मालकीन नीरा राडिया हैं।
अब इस सियासी-पूंजी-पत्रकारीय गुत्थी के रोचक धागे देखिए। 'वैष्णवी कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस ही रतन टाटा के भी काम-धाम देखती है और दूसरी तरफ एनडीटीवी और स्टार टीवी के काम भी। आप सबको यह पता ही है कि एनडीवी के प्रमुख प्रणव रॉय और प्रकाश करात दोनों साढू भाई हैं और वृंदा करात और राधिका रॉय दोनों सगी बहनें।
जिस जानकार गलियारे से यह खबर मिल रही है, वहां से यह भी पता चल रहा है कि तीन महिला राजनीतिक व्यक्तित्वों ममता-जयललिता-मायावती से भी नीरा राडिया की गहरी छनती है। स्वाभाविक है मायावती से छनेगी ही। क्योंकि सत्ता-घरौंदा बनाने में सक्रिय इन पूंजी घरानों का लक्ष्य केवल इसी काम के लिए हजार करोड़ रूपए से अधिक खर्च करने का है। यह भी जान ही लें कि केंद्र की सत्ता-पकड़ मजबूत करने के बाद नीरा के लिए अपना एयरलाइंस लॉन्च करने का रास्ता काफी सुगम हो जाएगा। टाटा को सिंगूर से अपना तंबू समेटने के लिए विवश करने वाली ममता बनर्जी के रतन टाटा की करीबी नीरा राडिया से नजदीकी संबंध, राजनीतिकों के दिलचस्प चरित्र का बखान ही तो हैं।
बहरहाल, यह सूचना भी पाठकों के लिए कम रोचक और प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देख रहीं मायावती के लिए कम चिंताजनक नहीं है कि मुकेश अंबानी ने हाल ही में अपने अमेरिका दौरे पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से अमेरिकी पिट्ठू बने रहने वाले भारतीय सत्ताधीश की संभावनाओं पर चर्चा की तो पहले अमेरिकी पसंद चंद्रबाबू नायडू, दूसरे नंबर पर शरद पवार और मायावती तीसरे नंबर पर निकलीं। अब यह तो मायावती को तय करना पड़ेगा कि वे इन उद्योगपतियों की खिचड़ी खाती हैं, या राजग-स्वाद लेती हैं...
News Published in Daily News Activist on March 05, 2009
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खबरें @ डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट
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